Wednesday, 7 January 2015

कार्टून का कटाक्ष

कार्टून का कटाक्ष

कार्टून का कटाक्ष इतना तेज होता है कि गोली और राकेट लांचर से भी तेज व्यक्ति के जेहन में घुस जाता है..
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स्व. मनोरंजन कांजीलाल चाचा जी, जगत नारायण शर्मा चाचा जी, विनय कुल चाचा जी और स्व. सुशील त्रिपाठी चाचा जी (कार्टून+पेंटिंग)... इन्हें बचपन से पढ़ते आया हूं... कांजीलाल चाचा जी के कई कार्टून पापा जी फाइलों में अब भी हैं और सुशील चाचा जी की तस्वीरों को नजदीक से देखा हूं...

अगर एक फोटो 1000 शब्द के बराबर माना जाता है, तो निश्चित रूप से एक कार्टून लाखों शब्द के बराबर होता है... कार्टून के द्वारा किसी चीज की आलोचना या बड़ाई दोनों ही एक अलग अंदाज में होता है... इसका कोई तोड़ नहीं होता...

उदाहरण देखिए फ्रांस की राजधानी पेरिस के चरमपंथी कार्टून से इतना घबड़ा गए कि पत्रिका के दफ्तर में हमला बोल दिया... शायद ये उनकी हार की बौखलाहट ही थी... उन्हें डर था कि ऐसे कार्टून उन जैसे चरमपंथियों को समाज से अलग कर देंगे...
मृतकों को श्रद्धांजलि...

Wednesday, 24 December 2014

मालवीय जी की आत्मा अब भी बीएचयू को पवित्र करती है

मालवीय जी की आत्मा अब भी बीएचयू को पवित्र करती है

साहेब जरा ‪#‎बीएचयू‬ जा कर देखो, लगेगा कि मालवीय जी की आत्मा अब भी उस कैंपस को पवित्र कर रही है... ‪#‎मालवीय‬ जी भगवान तुल्य हैं...
‪#‎भारत‬ रत्न' अपने देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है... इसके नाम में ही 'भारत' जुड़ा है... इसलिए यह सम्मान #मालवीय जी के कद को और ऊंचा कर रहा है... लेकिन ऐसे तथाकथित लोग जो मालवीय जी को यह सम्मान देने का विरोध कर रहे हैं, उनसे बस ये कहना चाहते हैं कि वे हम लोगों के लिए भगवान जैसे हैं... विरोध न करें... हिम्मत हो तो अंतिम सांस तक में उन्होंने जितना किया है उसका 1% भी कर के दिखा दें, मान लेंगे कि आप में कुछ दम है ...

मैं तो मानता हूं कि अब तक जिन 45 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है उसमें महामना निर्विवाद रूप से नंबर 1 पर हैं... उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती...

नोट: एक छोटा सा निवेदन भी है कि भाई लोगों, जरा मालवीय जी का नाम सम्मान से लो... मालवीय ना लिखो... जी लगा लो, महामना लगा लो... नहीं सम्मान दे सकते हो तो टाइम निकाल कर 2-3 घंटे मालवीय जी को गुगल पर सर्च करके पढ़ लो, अपने आप देने लगोगे..

Wednesday, 10 December 2014

दोस्त कहूं, तांत्रिक कहूं या फ्रॉड?

दोस्त कहूं, तांत्रिक कहूं या फ्रॉड?

आज गुगल पर ऐसे ही इमेज सर्च कर रहा था... अचानक एक तांत्रिक पर आंखें रूक गई... लगा इसे कहीं देखे हैं... याद ही नहीं आ रहा था... फिर पेज खोजते हुए उसके फेसबुक पेज तक पहुंच गए... कई फोटो देखने के बाद क्लियर हुआ कि अरे ये तो अपना .... दोस्त है...
मेरे ही मोहल्ले में रहता था... मेरे ही स्कूल से पढ़ा भी था... हां शायद कुछ गलत संगत में चला गया था...
भोपाल जाने से पहले जब मैं राघवेंद्र मिश्र ही था, तब वे एक बार आया था... बता रहा था भाई डकैती के इलजाम में पुलिस पकड़ ली थी... बड़ा परेशान चल रहे हैं... मैंने उसे एक भैया जो बड़े नेता हैं से मिलवाया, उसका काम हो गया था... इसके बाद आखिरी बांर होली में मिला था... सफारी गाड़ी से जा रहा था कहीं... मुझे देख कर अबीर लगाने के लिए रूका... फिर कहा- भाई कल मिलते हैं, बिजनेस प्लान किए हैं.. तुम्हें भी उसमें शामिल करना है... फिर निकल गया...

इसके बाद आज दिखा... तांत्रिक के भेष में... उसके बगल में एक गनर... न जाने कितना कंठी माला पहने हुए... उसके फेसबुक पेज पर कई वीडियो दिखा... इसमें वह श्मशान पर कुछ कर रहा था... इसके अलावा भी कई मंदिरों में खींचा हुआ फोटो लगाया हुआ था...

मजे की बात है उसने अपना एड्रेस-कलकत्ता, स्टडी इन- असम यूनिवर्सिटी, वर्क एज- भारतीय साधक, लिखा हुआ है... दुनिया भर के लोग उस पर गुरु जी चरण स्पर्श... गुरु जी अपना नंबर दीजिए... इस टाइप का कमेंट किए पड़े हैं...
क्या बोलूं... बस लगता है हिंदी शब्दकोश में आने वाले समय में चोर/डकैत का पर्यावाची बाबा ना हो जाए

Wednesday, 3 December 2014

हर लड़का खराब और हर लड़की सही ? ये कैसी सोच??

हर लड़का खराब और हर लड़की सही ? ये कैसी सोच??

हर लड़की का कॉलर सर्फ एक्सल से सफा और हर लड़का कीचड़ में सना... ई कैसा नजरिया??? वो कहां है जो स्कूटी का एक्सीडेंट हो जाए तो पूरे झुंड में उसे उठाने को दौड़ते हैं और बाइक सवार लड़के का हो जाए तो गरियाते हैं कि गिरने दो टशन मार रहा होगा...

लड़की-लड़कों में अंतर न करने वाले लोग कहां है भाई? दो लड़कियां लड़के को लात-घूसे से मारती हैं, एक लड़की वीडियो बनाती है... इसके बाद दोनों लड़कियां सीधे मर्दानी (झांसी की रानी) बन जाती हैं... लड़कियां, लड़कों को मार रहीं हैं तो ठीक ही कर रही हैं...

गुरु ऊपर से मर्दानी भी देख कर दुखी होंगी कि मरने के बाद सारे किए धरे पर ई सब पानी फेर दे रहे हैं... कोइयो से तुलना कर दे रहे हैं...

गलत लड़के भी हो सकते हैं और लड़कियां भी... जरूरत है दोनों को बराबर देखने की... नियम-कानून दोनों के लिए बराबर बनाने चाहिए...

मानते हैं कि लड़कियों के साथ छेड़खानी जैसे मामले ज्यादा हो रहे हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि बस कोई लड़की, किसी भी लड़की पर इल्जाम लगा दे और लड़के के साथ कहानी हो जाए... हुजूर तफ्तीश तो कर लेते...

लड़कियों के इस घटना और दो महीने पहले पार्क वाली घटना दोनों के वीडियो की तफ्तीश करनी चाहिए... अगर लड़कियों की गलती है तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए... लड़कियों पर छेड़खानी, मारपीट से लेकर मानहानी तक का केस दर्ज होना चाहिए... आखिर बिना गलती के बेइज्जत लड़के पर क्या गुजरता होगा...

Monday, 24 November 2014

मनीला ट्रांस का बीएचयू वर्जन

मनीला ट्रांस का बीएचयू वर्जन

दम-दम, बम-बम खिंच मेरे हमदम- ‪#‎मनीला‬ ट्रांस को हनी सिंह ‪#‎BHU‬ पर कुछ ऐसा गाते
दम-दम, बम-बम लूट मेरे हमदम
लूटेगा तू तो कहलाएगा #BHU नंबर वन
मजा लेगा तू वीसी, रिजस्ट्रार और प्रोफेसर बन ...
दम-दम, बम-बम #BHU को लूट मेरे हमदम...
बदला मिजाज, ‪#‎स्टूडेंट्स‬ यूनियन की मांग पर
मांग ऐसा है, जिससे उजागर होगी वहां फैली ‪#‎लूट‬ हर...
थोड़ा तो मार लो #स्टूडेंट्स को दौड़ा कर, ‪#‎पॉवर‬ के नशे में
पुलिस-पीएसी लगा के, ‪#‎हॉस्टल‬ में घूस के...
दम-दम, बम-बम लूट मेरे हमदम...
कैसे होता है, वहां ‪#‎रिक्रूटमेंट‬-प्रमोशन, कैसे मैं बताऊं ये
लगा है सब-कुछ ठाकुर-बाभन की लूट खसोट पंचाइत पर..
ठोड़ा-ठो़ड़ा माल, जो भी आया लूटा जाम...
दम-दम, बम-बम लूट मेरे हमदम...
जन्नत है ये #BHU परिसर, खानदानी विरासत के लिए कर ले इसे जतन
हम दम मेरे संग लूट की डोरी में बन जा तू पतंग...
दम-दम, बम-बम लूट #BHU मेरे हमदम...
नए कुलपति, तू भी मेरे साथ माल लूट ले जरा...
प्रमोशन करूं, हिस्सेदारी में तू शामिल कर ले जरा...
रजिस्ट्रार-रेक्टर बनाउंगा, तू वीसी हाउस में कश तो लगा ले यारी...
दम बोले दम तू #BHU का मजा लूट ले...
लूट का पैसा मिलेगा तो तू भूलेगी सारा गम...
दम दम बम बम लूट #BHU मेरे हमदम...

Thursday, 20 November 2014

बीएचयू के स्टूडेंट अराजक कैसे?

बीएचयू के स्टूडेंट अराजक कैसे?

#‎मोदी‬ जी आपके संसदीय क्षेत्र का हूं आपको ‪#‎वोट‬ भी नहीं दिया था, लेकिन 100 फीसदी कह सकता हूं कि आज ‪#‎BHU‬ के जिन छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ उसमें ‪#‎90फीसदी‬ ने जी जान लगा कर आपका प्रचार किया था... वो नहीं होते तो ‪#‎केजरीवाल‬ के एनजीओ वाले आपको‪#‎शीला‬ बना देते... इतना ही नहीं,
मोदी सरकार में चार ऐसे सांसद हैं जिन्हें मैं पर्सनली जानता हूं कि वो आज जो भी हैं #BHU की वजह से हैं...  ‪#‎सांसदऔरमंत्री‬ मनोज सिंहा, ‪#‎सांसद‬ महेंद्र पांडेय, #सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त,#सांसद मनोज तिवारी... ये सभी बीएचयू के प्रोडक्ट हैं और बनारस में ही इन सबका घर भी है.. फिर ‪#‎पीएम‬ मोदी का ‪#‎ऑफिस‬ भी है...

ऐसे लोगों के रहते #BHU के स्टूडेंट्स को पुलिस दौड़ा-दौड़ा कर मार रही थी... एक को गोली भी लग गई और सब खामोश हैं...

‪#‎रामपाल‬ को हरियाणा में मारना था तो तीन दिन इंतजार किए और ‪#‎स्टूडेंट्स‬ को आधे घंटा समझाने के बाद लाठीचार्ज...
ऐसा नहीं है कि #स्टूडेंट्स की गलती नहीं होगी, लेकिन ‪#‎पुलिस‬ और ‪#‎प्रशासन‬ उन्हें समझा नहीं सकती थी?????

जिन #स्टूडेंट्स को आज लोग अराजक बता रहे हैं वो इंट्रेस पास करके वहां एडमिशन लिए हैं और इतना तो है कि महामना हर किसी को अपने यहां घुसने नहीं देते, कुछ तो काबिलियत होगा ही इनमें... फिर भी वे अराजक हैं... क्या बोलें...........

Friday, 14 November 2014

यक्ष प्रश्न, जिसका उत्तर केबीसी वाला कंप्यूटर जी भी नहीं दे सकता

यक्ष प्रश्न, जिसका उत्तर अमिताभ बच्चन का केबीसी वाला कंप्यूटर जी भी नहीं दे सकता...

इसके जैसे बच्चे के लिए हर दिन एक जैसा बितता है... रोज भूख से लड़ना... दो रोटी के लिए मजदूरी करना... बोझा ढ़ोते, बड़ा होना... ठंडी में ठंड, गर्मी में सूरज की तपीश और बारिश में पानी सब इसके दुश्मन बने रहते हैं... इनकी मासूमियत, चेहरे की हंसी, इनका सपना सभी चीजें कुछ आवश्यक्ताओं में सीमटी होती हैं...

आज एक आंकड़ा मिला, जिसमें लिखा था कि सिर्फ बनारस में 12 हजार से ज्यादा कूड़ा बिनने वाले बच्चे हैं... इनकी उम्र 15 साल से कम है... हम बचपन को पाने की ख्वाहिश रखते हैं और ये उससे भागने की जुगत में लगे रहते हैं... हम बचपन के मस्ती भरे दिन को याद करते हैं, वो बचपन को बुरा सपना समझ भूल जाना चाहते हैं... हम अपने बचपन की तस्वीरों में मासूमियत और खुशी देखते हैं, उनके पास कोई तस्वीर ही नहीं होती, शायद वे शीशे को अपनी तकदीर समझकर उसे देखना ही न चाहते हों...
बाल दिवस पर नेहरू जी को मात्र श्रद्धांजलि देने में सैकड़ों, लाखों यहां तक कि करोड़ों खर्च कर रहे हैं, लेकिन इन बच्चों के लिए सिवाय उनके गरीबी की फोटों खींचने के सिवाय कुछ नहीं करते...
ये 21वीं सदी का भारत है... यहां न्यू ईयर, वेलेंटाइन डे, होली, फ्रेंड्सशीप डे, रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली, क्रिशमश, मडर्स डे, फाडर्स डे, सिस्टर्स डे, यहां तक कि अप्रैल फूल डे जैसे डे पर दूसरों को विश करने में न जाने कितना खर्च कर देते हैं... लेकिन बाल दिवस पर, कुछ लोग नेहरू के विचार को जानने में और कुछ उन्हें गरियाने के सिवाय कुछ नहीं करते...
नहीं मालूम कि नेहरू ने अपने जन्मदिन को क्यों बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, लेकिन जब हर दिन नए जमाने में कुछ नए कलेवर में आ गया है तो चिल्ड्रेंस डे क्यों नहीं?
अगर हम कहते हैं कि हम वैज्ञानिक युग के लोग हैं, सब कुछ बदल सकते हैं तो उसकी किस्मत क्यों नहीं बदल सकते जो अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ दो रोटी, तन धकने के लिए कपड़ा और रहने के लिए छांव के संघर्ष में बिता देता है... यक्ष प्रश्न है, लेकिन शायद इसका उत्तर देने के लिए सवा करोड़ आबादी में से कोई नहीं...